February 10, 2015

हरयाणा में किये गए वाल्कथॉन की ख़ुशी

जीवन में बहुत कम पल ऐसे होते हैं जब मनुष्य को लगता है की आज वास्तव में मैंने कुछ अच्छा काम किया स्वयं को ख़ुशी मिली अपने ही काम से ये पल ब्रेकथ्रू ने 31 jan को दिया जब गनौर में ब्रेकथ्रू ने walkthon के रूप में एक कार्यक्रम किया....

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Naiterpal

Singh


जीवन में बहुत कम पल ऐसे होते हैं जब मनुष्य को लगता है की आज वास्तव में मैंने कुछ अच्छा काम किया स्वयं को ख़ुशी मिली अपने ही काम से ये पल ब्रेकथ्रू ने 31 jan को दिया जब गनौर में ब्रेकथ्रू ने walkthon के रूप में एक कार्यक्रम किया. जिसमे हजारों लड़कियों को अपने अधिकारों को लेकर सड़क पर उतरा गया स्वयं में यह एक सपने जैसा था!

कार्यकरम की शुरुआत की ढोल नगाड़ों के साथ आरंभ हुआ यह कार्यकरम गनौर के R.P.S. school में हुआ! कार्यकरम का आरंभ ब्रेकथ्रू की टीम के बड़े अधिकारी सोनाली खान, वीनू कक्कड़ , बरनाली दास, मुकेश दिगानी और अन्य सदस्य शामिल थे । महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती कविता जैन और समाज सेवी ममता सौदा , डी एस पी पूजा डाबला और अन्य school प्रिंसिपल व् teachers शामिल थे । कविता जैन ने कहा की लिंग भेद व लिंग चयन को रोकना जरूरी है । इस दोरान पदम् श्री से सम्मानित माउंट एवरेस्ट को फ़तेह करने वाली माउंट गर्ल के नाम से जाने जाने वाली और जो पंचकुला की ए सी पी ममता सौदा ने मशाल उठाकर रैली को हरी झंडी दिखाई!

कल्पना जब हकीकत बन जाती है तो समाज उसे चमत्कार के नाम से संबोधित करता है ! ऐसे ही एक कल्पना जो ब्रेकथ्रू की टीम ने की थी वो 31 jan२०१५ की walkathon थी ! यह वास्तव में एक सपने जैसा लग रहा था की लड़कियों के चहरे पर जो ख़ुशी दिखाई दे रही थी ऐसा लग रहा था की वास्तव में उन्हें आज़ादी का अनुभव हों रहा हैं ! वह एक आजाद पक्षी की तरह गनौर की सड़कों पर चल रही थी डर , भय , जैसे शब्द उनके आस-पास भी नही थे ! उन्हें लग रहा की वास्तव में आज़ादी इसे कहते हैं । दायरों से बाहर निकलना ( ब्रेकथ्रू) इसे कहते हैं  जो की ब्रेकथ्रू संस्था का उदेश्य है . सबसे अच्छा जब लगा जब कार्यकरम का अंतिम समय था हजारों लड़कियां लाल कैप और टी शर्ट में सड़कों पर जोर जोर से अपने अधिकारों के लिए एक ही आवाज़ में आगाज़ दे रही थी ! और सम्पूर्ण समाज उनकी इस बहुदारी को देख कर चका चौंध हों रहा था ! जब सड़क से लड़कियां जोर जोर से नारे लगते हुए गुजर रही थी ऐसा लग रहा था की आज लाल रंग का सागर सडको पर उतर आया हों ! हम सभी भी रैली में पुरे जोश और उमंग के साथ आगे बढ़ रहे थे और हमे उस दोरान बहुत अन्नंद आ रहा था!

जब सब लड़कियां अपनी अपनी बसों में जा रहे थी तो सभी teachers और बच्चों का ब्रेकथ्रू की टीम ने उनका धन्यवाद किया ! तो सभी लड़कियां कह रही थी की सर ऐसा कार्यक्रम फिर कब होगा और यदि ऐसा होता है तो हमे जरुर बुलाना ! teachers और बच्चों के चहरों पर जो ख़ुशी थी मैं वास्तव में उसे ही आज़ादी बोल सकता हु ! यह पल एक दिन उन हजारों लड़कियों के लिये आज़ादी से कम नही था समाज के हर व्यक्ति ने गनौर की इस walkathon में अपनी भागेदारी दिखाई बढ़ चढ़ कर बेटियों के अधिकार और आज़ादी के लिये इस walkathon में शामिल हुए ! दूर दूर तक गनौर की सड़कों पर लाल रंग में लड़कियां अपनी आज़ादी को महसूस कर रही थी ! और उनके साथ सम्पुरण गनौर और ब्रेकथ्रू के समस्त सदस्य थे !

ब्रेकथ्रू की इस अद्भुत कामयाबी टीम के सभी सदस्य के चहरों पर झलक रही थी और सायद ये कह रहे थे की आज हमने अपने कम से और अपनी आत्मा से इन हजारों लड़कियों को दायरों से बाहर निकलने का रास्ता दिखया हैं जो की ब्रेकथ्रू का – उदेश्य है दायरों से बहार निकलना!

जब आपको ये लगे की आज अपने जो काम किया उससे आपको कितनी ख़ुशी महसूस हुई है और हमेशा वो पल आपके जीवन के सबसे महतवपूर्ण पलों में से है .

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