February 12, 2016
सार्वजनिक जगहों में यौन शोषण
आज हमारा समाज उन्नति कर रहा है पर आज भी समाज में पिछडापन है तथा महिलाओं को कमजोर समझा जाता है और उनको हर कदम पर नीचा दिखाने की कोशिश की जाती हैं।दिन-प्रतिदन महिलाओं के साथ यौन-शौषण की वारदातें भी बढती जा रही है। अब तो महिलाएं घर, बस स्टैंड,रेलवे...
Kuldeep
Singh
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आज हमारा समाज उन्नति कर रहा है पर आज भी समाज में पिछडापन है तथा महिलाओं को कमजोर समझा जाता है और उनको हर कदम पर नीचा दिखाने की कोशिश की जाती हैं।दिन-प्रतिदन महिलाओं के साथ यौन-शौषण की वारदातें भी बढती जा रही है। अब तो महिलाएं घर, बस स्टैंड,रेलवे स्टेशन,बसों,रेलों तथा बाजारों में भी सुरक्षित नहीं है। आए दिन यौन शौषण की घटनाएँ हमें सुनने को मिलती है।
अब तो लड़कियों का स्कूल व कालेज के लिए बस में जाना भी सुरक्षित नहीं है। बसों में भी यौन-शौषण की वारदातें आम हो गई हैं।
चलती बसों या रेलो में अपराधिक प्रवॄति के लोग महिलाओं के साथ गलत हरकतें (यौन-शौषण) करने का प्रयास करते हैं और जब ये महिलाएं विरोध करती है तो या तो जान से हाथ धो बैठती है या फिर इन महिलाओं को हो अपमानित होना पड़ता है। हम इतनी जल्दी निर्भया प्रकरण को कैसे भुला सकते है उसके साथ दरिदंगी चलती बस में हुई थी और अन्त में उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
अभी-अभी ‘रोहतक बहनों’ का प्रकरण मीडिया के द्वारा प्रकाश में आया। इन बहनों ने जब हिम्मत दिखाई तो ना जाने कैसे-कैसे इन्हें अपमानित होना पड़ा और ये बहनें आज तक अपमानित हो रही हैं उनको बार-बार अपमानित किया जा रहा है। उनको ताने सुनने को मिलते है।
इसका एकमात्र कारण हमारे शासन-तंत्र की ही कमियां है जो ये वारदातें कम होने का नाम ही नहीं ले रही। शासन-तंत्र की कमी के कारण ही अपराधिक प्रवॄति वाले लोगों के होसले बढते जा रहे हैं और महिलाएं बसों व रेलों तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यौन-शोषण का शिकार हो रही हैं ऐसी घटनाएं ना हो इसके लिए सरकार को कठोर कदम उठाने होगें। तथा पुरूषों को अपनी पितृसत्तात्मक सोच को बदलना होगा तथा पुरूषों के मनमें महिलाओं के प्रति जो भेदभाव की भावना है उसको अपने अपने मन से निकालना होगा। तभी यौन-शौषण की घटनाएं खत्म हो सकती हैं।
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